theinfozones blog
हमारे बचपन के संस्कार ही हैं
हमारे बचपन के संस्कार ही हैं
कि घर में हवन होते समय
घर के लड़के मंत्र भले ना बोल पायें
पर स्वाहा इतनी ज़ोर से बोलते हैं कि
सारी पापी आत्माएं आवाज़ सुनकर ही मर जाती हैं।
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